नशा रूपी राक्षस को भगा कर गायत्री मंत्र का नियमित जप का संकल्प लिया।
॥जमुआ,गिरिडीह, झारखंड॥ जमुआ के बरोटांड दुम्मा में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित चार दिवसीय राष्ट्र जागरण गायत्री महायज्ञ शुक्रवार को पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गई। 24 कुंडीय यज्ञशाला में दर्जनों गांव के लोग शामिल हुए और मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए यज्ञ आहुतियां प्रदान की। साथ ही अपने-अपने घरों से नशा रूपी राक्षस को भगा कर वेद मंत्र गायत्री का नियमित रूप से जप करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर 1008 दीपकों को प्रज्वलित कर वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य लिखित 3200 पुस्तकों को घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। मौके पर शांतिकुंज प्रतिनिधि ने कहा कि इस राष्ट्र को जीवंत और जागृत बनाने के लिए पूरे भारतवर्ष में गायत्री महायज्ञों की श्रृंखला चलाई जा रही है।
महायज्ञ में लगभग 200 बच्चों का विद्यारंभ संस्कार, 100 बच्चों का मुंडन संस्कार, 20 बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराया गया। साथ ही लगभग 90 लोगों ने परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी को गुरु मानते हुए गायत्री महामंत्र की दीक्षा ग्रहण कर मनुष्य मात्र के उज्जवल भविष्य एवं कल्याण के लिए नियमित तीन माला गायत्री महामंत्र जप का संकल्प लिया। महायज्ञ को सफल बनाने में कामेश्वर सिंह, अजय वर्मा, विष्णु नारायण वर्मा, परमेश्वर प्रसाद, किशोरी शर्मा, किशुन महतो, कृष्णा साव, सुरेश यादव, राजकुमार वर्मा, बलदेव महतो, बासुदेव महतो, संगीता साहू, रेनू साव, अंजना वर्मा, नीलम लोहानी, लता सिंह, नेहा साव, कंचन देवी, लीलावती तरवे सहित गायत्री परिवार एवं गांव के लोगों का सराहनीय योगदान रहा।
Recent Post
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 130): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 129): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 128): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 127): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 126): तपश्चर्या— आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 125): तपश्चर्या— आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 124): तपश्चर्या— आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 123): तपश्चर्या— आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य:
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 122): तपश्चर्या आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य
Read More
कौशाम्बी जनपद में 16 केंद्रों पर संपन्न हुई भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा
उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जनपद में अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज की ओर से आयोजित होने वाली भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा शुक्रवार को सोलह केंद्रों पर संपन्न हुई। परीक्षा में पांचवीं से बारहवीं...