रचनात्मक आन्दोलनों के प्रति जन-जन में उत्साह जगाए
यह यज्ञभाव को जनजीवन में उतारने का चुनौतीपूर्ण समय है
विगत आश्विन नवरात्र के बाद से अब तक का समय विचार क्रान्ति की दृष्टि से अत्यंत आन्दोलनकारी सिद्ध हुआ है। मुम्बई में अश्वमेध महायज्ञ के आयोजन, मध्य प्रदेश में प्रत्येक ग्राम पंचायत तक ‘मातृशक्ति श्रद्धा संवर्धन यात्राओं के भ्रमण से लेकर विगत पाँच-छ: माह में हर क्षेत्र में छोटे-बड़े गायत्री महायज्ञों के सार्वजनिक आयोजन सम्पन्न हुए। 24 से लेकर 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञों के लगभग 500 कार्यक्रमों का संचालन तो शान्तिकुञ्ज से भेजी गई टोलियों के माध्यम से ही किया गया। इस क्रम में पूरे देश में करोड़ों लोगों तक परम पूज्य गुरूदेव के क्रान्तिकारी चिंतन के साथ युग संदेश पहुँचा है।
इन दिनों बढ़ती गरमी के कारण यज्ञीय कार्यक्रमों की शृंखला भले ही शिथिल हो, लेकिन युग निर्माण आन्दोलन से जुड़े कार्यकर्त्ताओं की सक्रियता निश्चित रूप से बढ़ जाती है। वस्तुत: विभिन्न यज्ञीय कार्यक्रमों के माध्यम से यज्ञभाव को अपनाने का जो संदेश हमने लोगों को दिया है, उसे क्रियान्वित करने-कराने की दृष्टि से बड़ा महत्त्वपूर्ण समय यह ग्रीष्मकाल का होता है।
गंगा सप्तमी (14 मई 2024) : अखिल विश्व गायत्री परिवार गंगा सप्तमी के पावन पर्व की प्रेरणाओं को चरितार्थ करते हुए अपने भागीरथी जलाभिषेक अभियान के अंतर्गत विभिन्न नदी एवं अन्य जलाशयों की सफाई, जल शुद्धि-तट शुद्धि आदि के कार्यक्रम आयोजित करता है। यह लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने, जलाशयों को स्वच्छ रखने, आगामी वर्षा ऋतु आरंभ होने से पूर्व जलाशयों को स्वच्छ एवं गहरा करने, नए जलाशय तैयार करने, छतीय जल को भूमि में उतारने की तैयारी करने जैसे कार्यों का समय है।
कहा जाता है कि यदि भविष्य में तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो वह पानी को लेकर ही होगा। विश्व के बड़े-बड़े शहर सूखा ग्रस्त घोषित होने आरंभ हो गए हैं। अगर हम अभी नहीं चेते तो वह दिन दूर नहीं जब दुनिया लगातार बढ़ते प्रदूषण और गरमी के कारण पीने के पानी के लिए तरस जाएगी। अत: प्रत्येक देशवासी का यह नैतिक कर्त्तव्य है कि वह जल संरक्षण के लिए कुछ न कुछ अवश्य करे।
गायत्री परिवार की विभिन्न शाखाओं एवं कार्यकर्त्ताओं को इस दिशा में अवश्य सोचना चाहिए। सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रत्येक कार्यक्रम में इस आशय के संकल्प लोगों को दिलाने चाहिए। अगर व्यक्ति चाहे तो प्रतिदिन एक-दो बाल्टी जल का उपयोग कम करने, जितनी प्यास हो, उतना ही पानी ग्लास में लेने जैसे छोटे-छोटे संकल्प भी ले सकता है। ऐसे संकल्पों से जल संरक्षण के लिए लोगों में जागरूकता निश्चित रूप से बढ़ेगी।
व्यसनमुक्त भारत : व्यसन व्यक्तिगत जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप है। व्यक्ति यदि चाहे तो बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, गुटका, शराब जैसे तरह-तरह के व्यसन छोड़कर स्वयं अपने जीवन का कायाकल्प कर सकता है। व्यसन छोड़ने वालों की स्वास्थ्य की दृष्टि से, आर्थिक दृष्टि से, पारिवारिक कलह-अशांति की दृष्टि से परिस्थितियाँ आमूलचूल बदल जाती हैं तथा घर के नरक जैसे वातावरण में स्वर्ग की सृष्टि होने लगती है। अपराधों और दुर्घटनाओं के पीछे का सबसे बड़ा कारण यह नशा ही तो है। यदि नशा करने वाले पर उपरोक्त में से कोई भी प्रभाव तत्काल नजर न आता हो तो भी यह बुद्धि, स्मरण शक्ति को खोखला करता ही है।
31 मई अंतर्राष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस है और 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया जाता है। अखिल विश्व गायत्री परिवार ने इन दिनों ‘आओ बनाएँ नशामुक्त भारत’ अभियान चला रखा है। 16 करोड़ लोगों
के इस देव परिवार की सामर्थ्य कम नहीं है। यदि गायत्री परिवार का एक व्यक्ति नशा करने वाले एक व्यक्ति का भी नशा छुड़ाने की ठान ले तो हमें अपने अभियान में बहुत बड़ी सफलता मिल सकती है।
शासकीय और अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा भी व्यसनमुक्ति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, किन्तु हमारा अभियान विशेष है। हमारे पास परम पूज्य गुरूदेव एवं परम वंदनीया माताजी की दिव्य चेतना का संरक्षण और माता गायत्री की उपासना से मिली शक्ति है। हम संकल्पपूर्वक कदम बढ़ाते हैं तो सफलता मिलती ही है। आवश्यकता है अपने संकल्प को दृढ़ करने की, अपने यज्ञभाव को साकार करने की। यदि हम किसी ‘बेचारे’ को सही मार्ग पर लाकर उसका जीवन सुधार सके, सँवार सके तो हमारी यज्ञाहुतियाँ सार्थक हो जाएँगी।
गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ (23 मई 2024-बुद्ध पूर्णिमा):
गायत्रीतीर्थ-शान्तिकुञ्ज के निर्देशन में हर वर्ष प्राय: बुद्ध पूर्णिमा के दिन देश-विदेश में ‘गृहे-गृहे गायत्री यज्ञउपासना’ अभियान चलाया जाता रहा है। विगत वर्षों में एक दिन में 24 लाख घरों में गायत्री यज्ञ सम्पन्न हुए हैं। यह प्रयोग एक सामूहिक विराट अनुष्ठान सिद्ध हुआ है, जिससे परोक्ष जगत में प्रदूषण दूर होकर दिव्यता का संचार हुआ और लोगों का चिंतन-चरित्र बदला है। इसके सत्परिणामों को देखते हुए देश की अनेक शाखाओं ने इसे अपना साप्ताहिक अभियान बना लिया है।
अब तक की सफलता अद्वितीय है, लेकिन अब हमें इसके अगले चरण की ओर बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
अगले चरण हैं -
* जिन घरों में यज्ञ हुए हैं, उनका डाटा एकत्रित करना।
* उनके परिवारी जनों के जन्मदिन-विवाहदिन जैसे प्रसंगों पर प्रत्यक्ष पहुँचकर उन्हें शुभकामनाएँ प्रदान करना।
* अखण्ड ज्योति, युग निर्माण योजना, प्रज्ञा अभियान आदि पत्रिकाओं के माध्यम से उन तक परम पूज्य गुरूदेव के विचार और मिशन की गतिविधियों के समाचार पहुँचाना।
* हर क्षेत्र में मंडलों की स्थापना कर वहाँ नियमित स्वाध्याय, सत्संग, आरती, चालीसा पाठ, अनुष्ठान जैसे कार्यक्रम आरंभ करना।
* उन घरों को व्यसनमुक्त और शाकाहारी बनाने का प्रयास करना।
* सामाजिक सहकारिता और पारिवारिकता का वातावरण तैयार करने के लिए मिलकर पर्व-त्यौहार मनाना।
* उन्हें मिशन के सोशल मीडिया माध्यमों से जोड़ना।
विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) और विश्व योग दिवस (21 जून) भी सन्निकट हैं। गरमी के दिनों में इंडोर गतिविधियाँ ही प्राय: अधिक होती हैं। बच्चों के ग्रीष्मावकाश का लाभ लेते हुए बाल संस्कार शालाओं के संचालन, कन्या/किशोर कौशल शिविरों के आयोजन जैसे बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण के कार्यक्रम भी इन्हीं दिनों चलाए जाते हैं।
रचनात्मक आन्दोलनों की दृष्टि से देखा जाए तो आगामी दिन चुनौतियों वाले हैं। यह प्राय: हर व्यक्ति की विशेषताओं और क्षमताओं का सदुपयोग करने का अवसर है। इनके प्रति हम जितना जागरूक होंगे, जितने योजनाबद्ध प्रयास कर सकेंगे, उतनी ही सफलता हमें मिलेगी।
आइये! हम समझदारी और जिम्मेदारी के साथ अपना युगधर्म निभाएँ। लोगों में सृजनात्मक सक्रियता का उत्साह जगाएँ, संकल्प दिलाएँ। हमने अपना यज्ञ अभियान लोकप्रिय बनाया है, लेकिन लोकमंगल के लिए किया गया पुरूषार्थ ही सच्चा यज्ञ है, हमें इस भाव के प्रति जन-जन की निष्ठा अभी बहुत बढ़ानी है।
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