शांतिकुंज का दूसरा राहत काफिला उत्तरकाशी पहुँचा, पीड़ितों को मिलेगा त्वरित सहयोग
उत्तरकाशी
हाल ही में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद के धरासू क्षेत्र में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। घरों, होटलों और सम्पर्क मार्गों के टूट जाने से कई परिवार असमय संकट में फँस गए। ऐसे विकट समय में शांतिकुंज, हरिद्वार द्वारा संचालित अखिल विश्व गायत्री परिवार ने राहत एवं पुनर्वास के कार्यों में तुरंत सक्रियता दिखाई।
आपदा की सूचना मिलते ही शांतिकुंज द्वारा एक राहत दल आवश्यक सामग्री लेकर पहले ही उत्तरकाशी रवाना कर दिया गया था। इसके बाद अब दूसरा राहत काफिला भी कठिन पर्वतीय मार्गों और रास्तों में फैले मलबों को पार करते हुए उत्तरकाशी पहुँचा। राहत सामग्री में आटा, चावल, दालें, मसाले, नमक, चीनी, सूखा दूध, बिस्किट, गरम कपड़े, तिरपाल, सैनिटेशन किट आदि शामिल थीं।
स्वयंसेवकों का सेवाभाव प्रेरणादायक
इस सेवा कार्य का संचालन शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या के मार्गदर्शन में किया गया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे युवा समन्वयक ने बताया कि आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में 'सदैव साथ - सदैव तत्पर' की भावना से शांतिकुंज परिवार कार्य कर रहा है।
स्वयंसेवकों ने न सिर्फ राहत सामग्री का वितरण किया, बल्कि कई जगहों पर रास्तों में गिरे पत्थरों को स्वयं हटाकर रास्ता सुगम भी बनाया। यह कार्य स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में किया गया।
पूर्व अनुभवों से सीख, आपदा में अवसर की भूमिका
डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने बताया कि शांतिकुंज इससे पूर्व नेपाल भूकंप, उत्तराखंड आपदा, असम-बिहार बाढ़ आदि में भी अग्रणी भूमिका निभा चुका है। सेवा कार्य के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी पीड़ित परिवार राहत से वंचित न रहे।
प्रशासन का सहयोग और स्थानीय समर्थन
स्थानीय प्रशासन ने शांतिकुंज के प्रयासों की सराहना की और आवश्यकतानुसार सहयोग किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि शांतिकुंज द्वारा की गई यह पहल राहत प्रयासों को गति देने में सहायक सिद्ध हो रही है।
