वैरागी द्वीप में नौ कुंडीय यज्ञ का शुभारंभ: जन्मशताब्दी समारोह स्थल आध्यात्मिक ऊर्जा से अनुप्राणित
हरिद्वार, उत्तराखंड: सनातन संस्कृति में परम पवित्र माने जाने वाले मार्गशीर्ष (अगहन) मास की पूर्णिमा का पावन दिवस अखिल विश्व गायत्री परिवार के लिए अत्यंत विशेष रहा। परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के जन्मशताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में, दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह स्थल वैरागी द्वीप में 'वसुधा वंदन (तीर्थ रज पूजन)' जैसे अति विशिष्ट कार्यक्रम के अगले दिन, एक और महान आध्यात्मिक अनुष्ठान का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस दिव्य और भव्य आयोजन के अगले दिन, भगवान सविता (सूर्य) की स्वर्णिम एवं जीवनदायिनी किरणों के साथ ही, वैरागी द्वीप स्थित नौ कुंडीय यज्ञशाला में नियमित यज्ञों का शुभारंभ हुआ।
प्रतिकुलपति बने यज्ञ के मुख्य यजमान
वैरागी द्वीप की पवित्र भूमि पर स्थापित ५१ तीर्थों के पवित्र जल-रज को सादर वंदन कर प्रथम दिवस के इस पावन यज्ञ के मुख्य यजमान बने देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं उनकी सहधर्मिणी आदरणीया श्रीमती शेफाली पंड्या दीदी।
आदरणीय द्वय ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य 33 कोटि देवी-देवताओं का आह्वान किया और गायत्री महामंत्र की ऊर्जा से युक्त आहुतियाँ यज्ञ कुंडों में समर्पित कीं। यह यज्ञ-प्रक्रिया समारोह स्थल को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत करने का एक महत्वपूर्ण चरण था।
वैरागी द्वीप बना साधना का केंद्र
ज्ञातव्य है कि वैरागी द्वीप को शताब्दी समारोह हेतु यज्ञ एवं गायत्री जप की आध्यात्मिक ऊर्जा से अनुप्राणित करने के लिए यहाँ पूर्व से ही सूर्योदय से सूर्यास्त तक जप का दैनिक क्रम अनवरत गति से चल रहा है। आज, दिनांक 5 दिसंबर 2025 से, इस दिव्य भूमि पर नियमित नौ कुंडीय यज्ञों का भी शुभारंभ हो गया है, जो इस स्थल को विराट साधना के केंद्र में परिवर्तित कर रहा है।
यज्ञ-सम्पन्नता के पश्चात, आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणीया श्रीमती शेफाली पंड्या दीदी ने परिजनों के साथ सामूहिक साधना में भाग लिया, जिससे वैरागी द्वीप की ऊर्जा कई गुणा वर्धित हो गई।
यह नियमित यज्ञ श्रृंखला जन्मशताब्दी समारोह के लिए वैरागी द्वीप को एक विशिष्ट आध्यात्मिक अधिष्ठान प्रदान करेगी।
