प्रज्ञा संगीत संध्या : संस्कृति क्लब : देव संस्कृति स्टूडेंट्स क्लब एवं भारतीय शास्त्रीय संगीत विभाग, देव संस्कृति विश्वविद्यालय - विद्यार्थियों द्वारा विद्यार्थियों के लिए आयोजन
जहाँ शब्द समाप्त हो जाते हैं, वहाँ संगीत बोलता है।"
प्रज्ञा संगीत संध्या, केवल एक संगीतमय कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव था, जहाँ सुरों संग सार्थक शब्दों युक्त प्रज्ञा गीतों के माध्यम से आत्मा और चेतना का संवाद हुआ। प्रज्ञा गीतों की वर्तमान में प्रासंगिकता एवं महत्ता पर भी चर्चा की हुई।
इस संध्या का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत की गरिमा को स्थापित करते हुए युवाओं में सांस्कृतिक चेतना एवं प्रज्ञा को जागृत करना रहा। स्वर, राग, और ताल की समर्पित प्रस्तुति ने दर्शकों के हृदय को छू लिया और एक सजीव सांस्कृतिक वातावरण का सृजन किया।
प्रमुख आकर्षण:
प्रज्ञा गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ
प्रज्ञा गीतों की प्रासंगिकता पर चर्चा
छात्र - छात्राओं एवं विशिष्ट एलुमनाई अभ्यागत द्वारा प्रज्ञा गीत की प्रस्तुतियां
इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि भारतीय संगीत न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि यह साधना, समर्पण और आत्मिक उन्नति का पथ भी है जब यह प्रज्ञा संगीत के स्वरूप में प्रस्तुत होता है ।
