देव संस्कृति विश्वविद्यालय में “वैश्विक समस्याएं और सनातन समाधान” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
हरिद्वार, 6 सितंबर।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में “वैश्विक समस्याएं और सनातन समाधान” विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देशभर के 20 से अधिक विश्वविद्यालयों के 142 शोधार्थियों ने सहभागिता करते हुए समसामयिक वैश्विक संकटों पर आधारित शोध पत्र प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में बीएपीएस स्वामीनारायण शोध संस्थान के अध्यक्ष महामहोपाध्याय भद्रेशदास स्वामी, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेशचंद्र शास्त्री एवं शोभित विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेन्द्र मंचस्थ अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि आज विश्व अनेक जटिल समस्याओं से जूझ रहा है, जिनका समाधान भारत की सनातन परंपरा में निहित है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि एक समग्र जीवनदृष्टि है, जो आत्मकल्याण से लेकर लोकमंगल तक का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने अपने वक्तव्य में विभिन्न ऐतिहासिक और दार्शनिक उदाहरणों के माध्यम से यह प्रतिपादित किया कि भारतीय जीवन-दर्शन वैश्विक समस्याओं के समाधान का सक्षम आधार है।
मुख्य अतिथि महामहोपाध्याय भद्रेशदास स्वामी ने कहा कि शिक्षा, शोध और अध्यात्म मानव जीवन के लिए आवश्यक तत्व हैं। इनका समन्वय जहाँ भी होता है, वह भूमि स्वतः ही उन्नति की ओर अग्रसर हो जाती है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्ष परंपरा एवं शास्त्रों में आज की सभी जटिल समस्याओं का समाधान मौजूद है। स्वामीजी ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय की गतिविधियों को धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेशचंद्र शास्त्री ने कहा कि नैतिक पतन, पर्यावरणीय असंतुलन और सामाजिक विषमता जैसी चुनौतियों का समाधान हमारे प्राचीन ग्रंथों और जीवनमूल्यों में निहित है। उन्होंने कहा कि देसंविवि की यह पहल राष्ट्र निर्माण की दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली है।
शोभित विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेन्द्र ने कहा कि वर्तमान समय में जब युवा वर्ग दिशाहीनता की ओर बढ़ रहा है, ऐसे आयोजनों के माध्यम से उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना आवश्यक हो गया है।
इस अवसर पर मंचस्थ अतिथियों को गायत्री महामंत्र अंकित चादर, युग साहित्य और विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी के दौरान विभिन्न शोध-पत्रिकाओं और विशेषांकों का विमोचन भी किया गया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए गए।
संगोष्ठी के पूर्व अतिथियों ने प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर में पूजन-अर्चन किया एवं शौर्य दीवार पर वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में शिक्षा सचिव डॉ. सचिन चमोली, शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, कुलसचिव बलदाऊ देवांगन सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, संकाय सदस्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, शोधार्थी और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
