माताजी की 31वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धा, भक्ति और नारी जागरण के विविध आयोजन
हरिद्वार, 7 सितंबर।
गायत्री परिवार की संस्थापिका, युगमाता वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी की 31वीं पुण्यतिथि पर शांतिकुंज मुख्यालय सहित देश-विदेश के हजारों प्रज्ञा केंद्रों, महिला मंडलों एवं सेवाकेंद्रों पर विविध श्रद्धांजलि कार्यक्रम श्रद्धा व गरिमा के साथ आयोजित किए गए। इस अवसर पर महिलाओं द्वारा संचालित कार्यक्रमों की शृंखला ने माताजी के जीवन मूल्यों, विचारों और कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।
शांतिकुंज परिसर में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में देव संस्कृति विश्वविद्यालय एवं शांतिकुंज की बहिनों ने भजन, गीत, लघु नाटिका एवं प्राचीन वाद्य यंत्रों (बांसुरी, सितार, तबला आदि) की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से माताजी के विचारों एवं योगदान को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए माताजी के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर निकाली गई महिला जागरण रैली विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें हजारों बहनों ने “नारी जागरण” एवं “संस्कृति का उत्थान” जैसे नारों के साथ सहभागिता की। यह रैली शांतिकुंज से आरंभ होकर देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर से होती हुई पुनः शांतिकुंज में सम्पन्न हुई। रैली के सफल संचालन में भाइयों की स्वयंसेवक टीम ने यातायात, सुरक्षा एवं व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाई।
प्रातःकालीन सभा को संबोधित करते हुए महिला मंडल प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने कहा कि वंदनीया माताजी का सम्पूर्ण जीवन नारी सशक्तिकरण, सामाजिक जागरण और अध्यात्मिक चेतना के उन्नयन के लिए समर्पित रहा। वे हर नारी में देवीतुल्य शक्ति को देखती थीं और उनका विश्वास था कि यदि नारी जागेगी तो युग बदलेगा। माताजी ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि एक नारी किस प्रकार पूरे युग को दिशा दे सकती है।
अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं श्रद्धेया शैलदीदी ने इस अवसर पर अपने संदेश में कहा कि माताजी के जीवन मूल्य, उनका त्याग और नारी जागरण के प्रति समर्पण आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि “माताजी का यह कथन – ‘मेरे पास आने वाला हर व्यक्ति बेटा-बेटी समान है, मेरा घर सभी का मायका तुल्य है’, आज भी गायत्री परिवार की संस्कृति का आधार है।”
श्रद्धेय दम्पती ने कहा कि माताजी ने जीवन भर यह दृढ़ता से कहा था कि “21वीं सदी नारी सदी होगी”, और आज उनके उसी स्वप्न को साकार करने की दिशा में गायत्री परिवार सतत् कार्य कर रहा है।
सायंकालीन सभा में बहिनों के संचालन में गायत्री दीपमहायज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित साधकों ने माताजी के दिखाए मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ, जिसमें माताजी की स्मृतियों को नमन करते हुए समाज में सत्परिवर्तन के लिए अपने योगदान का संकल्प दोहराया गया।
पूरे आयोजन में मातृशक्ति की प्रमुख भूमिका रही। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बहनों की सहभागिता रही, जिन्होंने माताजी के जीवन प्रसंगों को साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व की प्रेरणाओं को याद किया।
