शांतिकुंज से उठ रही है युग क्रांति की लहर – जीवन साधना शिविरों में जाग उठा नवचेतना का प्रकाश
हरिद्वार, 8 सितंबर 2025 (संवाददाता):
शांतिकुंज, हरिद्वार—जो परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा स्थापित युग तीर्थ है—आज उनके दिव्य स्वप्नों को साकार करता हुआ 'क्रांतिकुंज' के रूप में आकार ले रहा है। पूज्य गुरुदेव अकसर कहा करते थे कि “शांतिकुंज से आने वाले समय में क्रांतियाँ रेलगाड़ी के डिब्बों की तरह एक के बाद एक चलेंगी।” वर्तमान में यह वाक्य ध्येय वाक्य बनकर साकार हो रहा है।
परम पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माताजी के सूक्ष्म संरक्षण में, श्रद्धेय द्वय के दिव्य संकल्पों के अनुकरण में तथा देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी के प्रेरणादायक नेतृत्व में आज शांतिकुंज विविध युग निर्माण गतिविधियों का सशक्त केंद्र बन चुका है।
युवाओं, नारीशक्ति व समाज के जागरण हेतु चल रहे विविध शिविर
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में इन दिनों युवा जागरण, कन्या कौशल विकास, नारी जागरण, राष्ट्र रक्षा-आपदा प्रबंधन तथा जीवन साधना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विविध राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। देशभर से हजारों की संख्या में परिजन इन शिविरों में भाग लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में युग चेतना की अलख जगा रहे हैं।
इसी क्रम में 6 से 8 सितंबर तक आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के 200 से अधिक परिजनों के लिए एक विशेष जीवन साधना सत्र आयोजित किया गया। इसके साथ ही, 7 से 10 सितंबर तक स्वाध्याय संदोह श्रद्धा संवर्धन हेतु एक अन्य विशिष्ट शिविर का आयोजन भी किया गया है।
संयुक्त सत्र को डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने किया संबोधित
दोनों शिविरों के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कहा, “आप ऐसे पुण्य समय में यहाँ साधना के लिए आए हैं, जब समस्त अखिल विश्व गायत्री परिवार, परम वंदनीया माताजी की जन्मशताब्दी तथा दिव्य अखंड दीप के शताब्दी वर्ष का महोत्सव मना रहा है। यह अवसर केवल भाग्यशाली साधकों को प्राप्त होता है।”
उन्होंने प्रतिभागियों को आह्वान किया कि वे इस तीर्थ की दिव्यता को आत्मसात कर समाज के बीच जाकर मिशन की विचारधारा को प्रसारित करें। उनके ओजस्वी और भावप्रवण उद्बोधन से प्रतिभागियों ने एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया और युग निर्माण मिशन के कार्यों में निष्ठा पूर्वक जुटने का संकल्प लिया।
