Water Vision@2047: हिमालय पर्यावरण संवाद में गूंजा प्रकृति संरक्षण का मंत्र
“मनुष्य ने यदि प्रकृति का संरक्षण नहीं किया तो वह अपने ही भविष्य को संकट में डाल देगा। प्रकृति हमारी माता है, इसका दोहन नहीं अपितु संवर्द्धन ही हमारा धर्म है।”
— पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
इन्हीं प्रेरणादायी विचारों को आत्मसात करते हुए आज देव संस्कृति विश्वविद्यालय एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के संयुक्त तत्वावधान में Water Vision@2047 : हिमालय पर्यावरण संवाद का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं कुलपति आदरणीय श्री शरद पारधी जी ने सभी माननीय अतिथियों का पुष्पगुच्छ अर्पित कर हार्दिक स्वागत किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कहा कि “प्रकृति के साथ सहजीवन ही मानवता के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है। हिमालय और जल का संरक्षण सतत् विकास की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।”
माननीय श्री भूपेन्द्र यादव जी, केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री, भारत सरकार ने कहा कि “हिमालय केवल पर्वत नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। इसका संरक्षण करना सम्पूर्ण मानव समाज का सामूहिक दायित्व है।”
आदरणीय डॉ. अफरोज अहमद जी, माननीय न्यायाधीश, राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने कहा कि “नीति और व्यवहार में समन्वय स्थापित कर ही हम पर्यावरणीय न्याय सुनिश्चित कर सकते हैं।”
आदरणीय श्री मनु गौड़ जी, सदस्य, राष्ट्रीय सलाहकार समिति ने कहा कि “नदियों की सुरक्षा, भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता की रक्षा का मूल है। जल संरक्षण हमारे आस्तित्व से जुड़ा हुआ प्रश्न है।”
आदरणीय श्री रमन कांत जी, अध्यक्ष, भारतीय नदी परिषद ने कहा कि “भारत का इतिहास और आध्यात्मिक परम्परा नदियों एवं प्रकृति से गहराई से जुड़ी है। इसका संरक्षण हमारे संस्कार का अंग होना चाहिए।”
इस संवाद के पूर्व विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों हेतु विभिन्न प्रतियोगिताएँ एवं गतिविधियाँ आयोजित की गईं। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में विद्यमान 4225 वृक्षों पर आधारित एक विशेष कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया, जो विश्वविद्यालय की हरित पहल का जीवंत दस्तावेज़ है।
अंत में पावन वैदिक परम्परा के अनुसार वृक्ष पूजन सम्पन्न हुआ। तत्पश्चात् माननीय केन्द्रीय मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव जी ने विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर इस संवाद को एक सार्थक दिशा प्रदान की।
