गायत्री शक्तिपीठ, नाराकोडरू में ‘सजल श्रद्धा, प्रखर प्रज्ञा’ ध्यान कक्ष एवं गायत्री स्तंभ का लोकार्पण — आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने किया उद्बोधन
दक्षिण भारत की अपनी यात्रा के अगले क्रम में आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी, प्रतिकुलपति, देव संस्कृति विश्वविद्यालय तथा प्रतिनिधि, अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज, हरिद्वार का गायत्री शक्तिपीठ, नाराकोडरू में आगमन हुआ।
इस अवसर पर उन्होंने ‘सजल श्रद्धा, प्रखर प्रज्ञा’ ध्यान कक्ष एवं गायत्री स्तंभ का लोकार्पण किया। सप्तऋषियों का पूजन एवं माँ गायत्री की आरती कर साधना शिविर हेतु नव-निर्मित आवास भवन का अवलोकन किया। यह स्थल उपासना, साधना और आराधना के संवर्धन का केंद्र बनकर उभर रहा है।
वहाँ उपस्थित परिजनों को परम पूज्य गुरुदेव का संदेश देते हुए डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कहा – “आज ‘सजल श्रद्धा, प्रखर प्रज्ञा’ का लोकार्पण एक दिव्य क्षण है। श्रद्धा मनुष्य के जीवन में तब आती है जब व्यक्ति अपने आप को समर्पित कर देता है। जो अपने को खो देता है, वह भगवान का हो जाता है। आज के दिन यहाँ साक्षात परम पूज्य गुरुदेव एवं वंदनीय माताजी का आगमन हुआ है। प्रखर प्रज्ञा और सजल श्रद्धा किसी के लिए स्मारक है, किसी के लिए मंदिर है — हमारे लिए साक्षात भगवान हैं। आज का दिन हमारी श्रद्धा, विश्वास और समर्पण के जागरण का दिन हो, और जन-जन के हृदय में परम पूज्य गुरुदेव का ज्ञान-आलोक हम सबके माध्यम से प्रज्वलित हो।”
