देव संस्कृति विश्वविद्यालय में ‘देव दीपावली’ के अवसर पर ‘#Shantikunj’ का लोकार्पण “जहाँ संस्कृति जीवन का आधार बने, वही सच्चा विश्वविद्यालय है।”
हरिद्वार।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय में 05 नवम्बर, 2025 को ‘देव दीपावली’ (कार्तिक पूर्णिमा) के पावन अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में निर्मित ‘#Shantikunj’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित हुआ। यह प्रतिमा विश्वविद्यालय के मूल दर्शन—‘संस्कृति, साधना एवं समाज निर्माण’—के प्रतीक स्वरूप स्थापित की गई है।
कार्यक्रम के आरंभ में प्रतिकुलपति, देव संस्कृति विश्वविद्यालय, आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं श्रीमती शेफाली पंड्या जी
प्रबंधिका, गायत्री विद्यापीठ, ने उपस्थित अतिथियों के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। वेदमंत्रों की पवित्र गूंज एवं गायत्री मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण में दिव्यता एवं शांति का संचार हुआ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी (माननीय सांसद, हरिद्वार), स्वामी विश्वेश्वरानंद जी महाराज महामंडलेश्वर, संन्यास आश्रम तथा श्रीमती रूबल नागी जी (इंडियन आर्टिस्ट एवं सोशल एक्टिविस्ट) सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने की। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने कहा—
“#Shantikunj केवल एक कलात्मक रचना नहीं, यह हमारे गुरु परंपरा, साधना और युग निर्माण के संकल्प का सजीव प्रतीक है। यह प्रत्येक साधक को यह स्मरण कराती रहेगी कि देव संस्कृति का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दिव्यता का विस्तार करना है।”
लोकार्पण के उपरांत उपस्थित अतिथियों #Shantikunj का अवलोकन कर विश्वविद्यालय में संचालित सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक पुनर्जागरण के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए यह संदेश दिया गया कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय सतत् उस आदर्श की दिशा में अग्रसर है, जहाँ शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास नहीं, बल्कि मानव में निहित ईश्वरीय चेतना का जागरण है।
