असम-अरुणाचल प्रवास : साधना, श्रद्धा और सेवा से युक्त युगप्रेरक संगम
तिनसुकिया एवं सुनपुरा (असम–अरुणाचल प्रदेश)।। 08 नवम्बर 2025
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के युवा प्रतिनिधि, आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने अपने दो दिवसीय असम–अरुणाचल प्रवास के क्रम में तिनसुकिया एवं सुनपुरा स्थित गायत्री शक्तिपीठों का दिव्य अवलोकन किया।
तिनसुकिया शक्तिपीठ में साधना, श्रद्धा और सेवा का संगम डिब्रूगढ़ से प्रस्थान कर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी तिनसुकिया शक्तिपीठ पहुँचे, जहाँ परिजनों ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। उन्होंने वेदी पर पुष्पांजलि अर्पित कर परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी एवं परम वंदनीया माताजी के प्रति श्रद्धा निवेदित की। इसके उपरांत परिजनों के साथ एक प्रेरणादायी संवाद सत्र का आयोजन हुआ।
सुनपुरा शक्तिपीठ में श्रद्धा, प्रेरणा और युगसंदेश का आलोक तिनसुकिया से आगे यात्रा करते हुए आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी अरुणाचल प्रदेश के सुनपुरा स्थित गायत्री शक्तिपीठ पहुँचे, जहाँ परिजनों ने हर्षोल्लास के साथ उनका स्वागत किया और क्षेत्रीय सेवा गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने वेदी पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर पूज्य गुरुदेव और वंदनीया माताजी का वंदन किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा—“हर शक्तिपीठ उस शक्ति का प्रतीक है जो मनुष्य को पशुता से देवत्व की ओर ले जाती है। जब हम सेवा, साधना और स्वाध्याय को जीवन का अंग बना लेते हैं, तभी युग परिवर्तन की दिशा सशक्त बनती है।”
उन्होंने परिजनों को सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण एवं युवा चेतना जैसे अभियानों को और अधिक गति देने हेतु प्रेरित किया।
