असम की तपोभूमि अत्रिघाट में आध्यात्मिक उर्जा का महापर्व : 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ सम्पन्न
अत्रिघाट चाय बागान, उदालगुरी, असम। 09 नवम्बर, 2025
गुवाहाटी के पावन अत्रिघाट चाय बागान क्षेत्र में आयोजित 108 कुण्डीय विराट गायत्री महायज्ञ की भव्य पूर्णाहुति समारोह में अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी की प्रेरणादायी उपस्थिति रही।
सैकड़ों श्रद्धालु परिजन एवं नागरिकों ने श्रद्धाभाव से यज्ञ में भाग लिया। वातावरण में वेदमंत्रों की गूंज, आहुतियों की सुगंध और समर्पण की भावना से संपूर्ण परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से अनुप्राणित हो उठा।
अपने प्रेरक उद्बोधन में आदरणीय भैया जी ने “यज्ञ पिता, गायत्री माता” विषय पर बोलते हुए कहा—
“जो बाँटते हैं, वहीं लौटता है। जीवन का सार संग्रह में नहीं, वितरण में है। दिल बड़ा करें, बटोरना नहीं, बाँटना सीखें। जो मिला है, यदि उसे आगे नहीं देंगे, तो मिलेगा कैसे? देने की भावना ही यज्ञ है, और यही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।”
उन्होंने कहा कि युग निर्माण की नींव इसी यज्ञीय भावना पर टिकी है, जहाँ स्वार्थ की जगह सहयोग और भोग की जगह त्याग का प्रकाश फैलता है।
इस अवसर पर आदिवासी बहिनों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति दी गई, जिसने सभी के हृदयों को आनंद और गर्व से भर दिया। कार्यक्रम के दौरान आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी का स्नेहपूर्ण स्वागत एवं सम्मान किया गया।
पूर्णाहुति की इस पावन बेला में परिजनों ने पूज्य गुरुदेव के संदेश “हम बदलेंगे, युग बदलेगा” का सामूहिक उद्घोष कर नवनिर्माण के संकल्प को पुनः दृढ़ किया।
संपूर्ण अत्रिघाट चाय बागान क्षेत्र श्रद्धा, प्रेरणा और युगसंदेश की ऊर्जा से आलोकित हो उठा।
महायज्ञ की पूर्णाहुति के उपरांत आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी अत्रिमुनि के मंदिर पर प्रणाम एवं दर्शन करने पहुंचे जहां पर उन्होंने अत्रिमुनि मंदिर में प्रणाम, ध्यान एवं मंत्रजाप किया। इसके साथ ही उन्होंने वहां पर स्थित पावन यज्ञकुंड के भी दर्शन किए।
