संथाल आदिवासी वीर शहीद सिदो - कान्हो मुर्मू क्रांति स्थल पर भावभीनी पुष्पांजलि एवं आत्मीय परिजनों से भेंट
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्र बलि वेदी पर अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले महान क्रांतिकारी आदिवासी भाईयों सिदो कान्हू जी के क्रांति स्थल पर झारखंड प्रवास पर पधारे अखिल विश्व गायत्री परिवार युवा प्रतिनिधि डॉक्टर चिन्मय पंड्या जी ने समस्त गायत्री परिजनों की भावभीनी पुष्पांजलि एवं श्रद्धा सुमन अर्पित किए ।
सिदो मुर्मू एवं कान्हू मुर्मू एवं अन्य दो भाई चाँद और भैरव मुर्मू संथाल आदिवासी थे जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल 30 जून, 1855 में हूल क्रांति - संथाल विद्रोह के रूप में नेतृत्व किया । अमर शहीद सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में भोगनाडीह गांव से ‘हूल क्रांति’ की शुरुआत हुई ।
26 जुलाई, 1855 को सिद्धू और कान्हू को गिरफ्तार कर जिस पेड़ पर फांसी दे दी गई उस स्थान को क्रांति स्थल के रूप में जाना जाता है । स्वातंत्र्य अग्नि में स्वयं को आहूत करने वाले इन वीर बलिदानियों को भावपूर्वक स्मरण कर उसी वट वृक्ष के सानिध्य में उनकी वीरता को स्मरण कर आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या जी ने बारंबार नमन किया ।
जन्मशताब्दी वर्ष २०२६, विचार क्रांति - युग निर्माण योजना के निमित्त प्रेरणा लेकर जन - जन के मध्य शुभ भावों का संचार एवं आत्मीयतापूर्ण भेंट का क्रम भी अनन्य आत्मीय परिजनों संग सम्पन्न हुआ ।
