दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह: वैरागी द्वीप पर महाश्रमदान अभियान ने पकड़ी रफ़्तार
हरिद्वार (उत्तराखंड)। परम पूजनीया परम वंदनीया माताजी के जन्म शताब्दी समारोह एवं दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह की तैयारियाँ हरिद्वार के वैरागी द्वीप क्षेत्र में पूरे जोश के साथ जारी हैं। 22 नवंबर को चल रहा महाश्रमदान अभियान नए विस्तार के साथ और अधिक गति पकड़ता दिखाई दिया।
मुख्य निर्माण के साथ सौन्दर्यीकरण का अभियान
जहां एक ओर समारोह के मुख्य कार्यक्रम स्थल पर निर्माण कार्य विधिवत रूप से प्रारंभ हो गया है, वहीं दूसरी ओर, श्रमदान का यह पुनीत अभियान अब कार्यक्रम स्थल के आस-पास के क्षेत्रों तक भी फैल गया है। कार्यकर्तागण पूरी ऊर्जा के साथ आसपास के क्षेत्रों में उगे घास-फूस, कूड़े-कचरे को हटाने के सघन अभियान में जुट गए हैं। समस्त वैरागी द्वीप कैंप क्षेत्र को समारोह के अनुरूप आकर्षक और स्वच्छ बनाने के लिए सौन्दर्यीकरण के प्रयासों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
हर आयु वर्ग का उत्साहपूर्ण समर्पण
इस महाश्रमदान में युवा, वृद्ध, किशोर, नर और नारी—हर आयु वर्ग के परिजन शामिल हैं। सभी कार्यकर्त्ता प्रफुल्लित मन से श्रम देवता की उपासना कर रहे हैं। परिजन पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी और परम वंदनीया माता जी की पावन (पवित्र) स्मृतियों का गुणगान करते हुए सेवा कर रहे हैं, जो उन्हें अथक परिश्रम की प्रेरणा दे रहा है। जन्मशताब्दी कार्यालय के संयोजन और मार्गदर्शन में यह सेवा श्रमदान अब अनेक गुनी रफ़्तार से चल रहा है, जो दर्शाता है कि परिजनों में समारोह को सफल बनाने का कितना गहरा संकल्प है। इस अवसर पर, पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के जीवन और दर्शन से संबंधित यह उद्धरण श्रमदान की भावना को सही मायनों में अभिव्यक्त करता है: "मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी उसका श्रम है। शरीर से किया गया प्रत्येक श्रमदान, यज्ञ के समान पवित्र होता है, जो व्यक्ति और समाज दोनों का उत्थान करता है।" यह महाश्रमदान केवल भौतिक निर्माण नहीं, बल्कि आत्मिक साधना और सामूहिक समर्पण का एक विराट प्रदर्शन है।
