151 कुंडीय महायज्ञ के दीपमहायज्ञ में आदरणीय पंड्या जी का स्वागत एवं उद्बोधन
उत्तर प्रदेश प्रवास के तृतीय दिवस के आगामी चरण में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी का बस्ती, उत्तर प्रदेश में आयोजित 151 कुण्डिया विराट गायत्री महायज्ञ के दीपमहायज्ञ कार्यक्रम में हार्दिक स्वागत किया गया।
दीपमहायज्ञ की दिव्य आभा में आदरणीय पंड्या जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं, परिजनों एवं यज्ञ-भाव से जुड़े कर्मशील स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि—यज्ञ केवल एक अनुष्ठान नहीं, वरन् जीवनशैली है, जो व्यक्ति के भीतर देवत्व और समाज में सद्भावना का संचार करती है।
ईश्वर ने इस सृष्टि में असंख्य जीवों को जन्म दिया है, परन्तु मनुष्य को विशेष विचार-शक्ति, विवेक और आत्मोन्नति की क्षमता देकर उसे एक अद्वितीय अवसर प्रदान किया है। वास्तव में मनुष्य-जीवन ईश्वर का दिया हुआ सबसे बड़ा उपहार है—क्योंकि यही जीवन हमें अपने भीतर के दिव्य को पहचानने और दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाने का सामर्थ्य देता है।
उन्होंने कहा भगवान ने हमें केवल जीने के लिए नहीं, बल्कि महान बनने और इस धरती को और सुंदर बनाने के लिए भेजा है। विचार हमें देवत्व तक ले जाते हैं, संकल्प असंभव को संभव बनाते हैं, और संवेदना हमें ईश्वर के निकट पहुँचा देती है।
आदरणीय पंड्या जी का उद्बोधन श्रोताओं में गहन आध्यात्मिक प्रेरणा, उत्साह और नवचेतना का संचार करता रहा। यज्ञ स्थल पर फैली दिव्यता और संयुक्त साधना की ऊर्जा ने कार्यक्रम को और भी भव्य एवं मंगलमय बना दिया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश में निवासरत देव संस्कृति विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र तथा बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुगण, आदरणीय डॉ. पंड्या जी के आगमन से अभिभूत हुए। सभी ने गुरुदेव की ज्ञान-धारा को अपने जीवन में और गहराई से धारण करने का संकल्प पुनः दोहराया।
कार्यक्रम उपरांत आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी बस्ती की जिलाधिकारी, आईएएस कृतिका ज्योत्सना जी से सौजन्य भेंट हेतु उनके निवास पहुंचे, जहाँ उन्होंने जन्मशताब्दी पर्व हेतु हरिद्वार आगमन का औपचारिक निमंत्रण प्रदान किया।
